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राजा रघुवंशी मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को दिया अल्टीमेटम, "सरेंडर करो या मेरिट पर फैसला सुनो"

 Written By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jul 21, 2026 03:05 pm IST,  Updated : Jul 21, 2026 03:12 pm IST

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने घटना के बाद सोनम के आचरण और रवैये पर भी सवाल खड़े किए। पीठ ने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा कि सोनम ने पहले यह आधार क्यों नहीं उठाया था कि गिरफ्तारी के समय उसे "गिरफ्तारी के आधार" की जानकारी नहीं दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में राजा रघुवंशी मर्डर केस की सुनवाई- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट में राजा रघुवंशी मर्डर केस की सुनवाई Image Source : FILE (PTI/REPORTER INPUT)

मेघालय के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी और मृतक की पत्नी सोनम रघुवंशी को दो विकल्प दिए हैं। मेघालय सरकार द्वारा सोनम को मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ किया है कि आरोपी के पास केवल दो ही रास्ते बचे हैं। सोनम पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का आरोप है।

जस्टिस एमएम सुंदेश और पीबी वराले की बेंच ने सोनम के वकील से कहा कि कोर्ट या तो उनकी दलीलें सुनने के बाद मेघालय सरकार की अपील (उनकी जमानत के खिलाफ) पर मेरिट के आधार पर फैसला कर सकता है, या फिर जमानत के मामले पर विचार करने के दौरान उन्हें अभी सरेंडर करने (गवाहों से पूछताछ के लिए) का निर्देश दे सकता है। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा, "आपके (सोनम के वकील के) पास दो विकल्प हैं। या तो हम मेरिट के आधार पर आदेश पारित करेंगे या हम आपको सरेंडर करने के लिए कहेंगे और सरकारी गवाहों को आपसे पूछताछ करने देंगे। इस बीच, हम जमानत के मामले पर मेरिट के आधार पर फैसला करेंगे।" सोनम के वकील ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा और कोर्ट को बताया कि वह गुरुवार तक जवाब देंगे।

कोर्ट ने आरोपी के आचरण पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने घटना के बाद सोनम के बर्ताव पर भी सवाल उठाए और इस आरोप पर सफाई मांगी कि सोनम ने पहले यह बात नहीं उठाई थी कि उन्हें "गिरफ्तारी के आधार" नहीं बताए गए थे। सोनम की जमानत का विरोध करते हुए, मेघालय सरकार की ओर से पेश भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि सोनम ने खुद पुलिस के सामने सरेंडर किया था और बाद में वह अपनी गिरफ्तारी को इस आधार पर चुनौती नहीं दे सकतीं कि उन्हें गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए थे। उन्होंने कहा कि अरेस्ट मेमो में कोई भी चूक महज एक क्लर्क की गलती थी। 

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "अगर गिरफ्तार आरोपी रंगे हाथों पकड़ा जाता है, तो गिरफ्तारी के कारण बताने की कोई जरूरत नहीं होती। अगर कोई व्यक्ति सरेंडर करता है, तो गिरफ्तार व्यक्ति यह आधार नहीं बना सकता कि उसे गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए। अगर आरोपी खुद पुलिस के पास आती है, तो पुलिस के लिए गिरफ्तारी का कोई कारण नहीं बनता।"

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